शनिवार, 20 मार्च 2010

नन्हें बादलों को कभी किसी ने ऐसी नज़र से देखा है क्या, जिस नज़र से बाबा देखते हैं?

नभ में चौकडियाँ भरें भले
शिशु घन-कुरंग
खिलवाड़ देर तक करें भले
शिशु घन-कुरंग
लो, आपस में गुथ गए खूब
शिशु घन-कुरंग
लो, घटा जल में गए डूब
शिशु घन-कुरंग
लो, बूंदें पडने लगीं, वाह
शिशु घन-कुरंग
लो, कब की सुधियाँ जगीं, आह
शिशु घन-कुरंग
पुरवा सिहकी, फिर दीख गए
शिशु घन-कुरंग
शशि से शरमाना सीख गए
शिशु घन-कुरंग

2 टिप्‍पणियां:

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  2. बाबा नागार्जुन !!!! कितना सुंदर !!!! हार्दिक धन्यवाद .

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